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Hymn No. 961 | Date: 12-Apr-1999
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तरसाना सीखना है तो कोई तुझसे सीखे, आदत लगाके छुडाने की बात है करता
तरसाना सीखना है तो कोई तुझसे सीखे, आदत लगाके छुडाने की बात है करता
खेल खेलना जारी रहता है प्यार का तेरा, समझ नहीं आया हमको कब रोग लगा बैठे ।
मर्ज बढ़ता जा रहा है हिदायत तो तूने बहुत दी थी, पालन करना हमे न आया
साया बना ले अपना, सुकूँ मिल जायेगा दिल को कुछ न जाने कितने जन्मो की मिट जायेगी प्यास।
आसरा न है तेरे सिवाय किसीका, खत्म कर दे तेरे-मेरे बीच का जन्मों पुराना फासला ।
शायद जो न समझा था अब तक, समझ जायेंगे पलक झपकते तेरा बनते ही ।
अब तक था कागज का मैं शेर, तेरा प्यार पाके निकल जायेगा दुनिया भर का डर मनसे ।
तेरी सत्ता में है मेरी सत्ता ऊपर का चाम बदले तो क्या से तू है अजेय ......
निर्बल है मन मेरा बदलते रहते हैं भाव इसके, अनजाने में कर बैठता हूँ तेरे दिल पे ऐतबार ।
दे दे तेरे प्यार की घनी छाव, मिट जाये मेरी सारी पहचान प्यार से भरी महफिल में
- डॉ.संतोष सिंह
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भुला न पाये हम कुछ, तुझे देखते ही भूल गये सब कुछ ।
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मेरे प्रभु के एक से एक भगत, इनके आगे सूरज-चांद की कोई बिसात नहीं ।
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