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Hymn No. 970 | Date: 14-Apr-1999
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क्या होगा जब एक दिन भविष्य से भूत में बदल जायेंगे ।
क्या होगा जब एक दिन भविष्य से भूत में बदल जायेंगे ।
अज्ञान में मैं और तू है, प्रेम में सर्वत्र तू ही तू है ।
सही और गलत कहलाता है मन के भेद से, एक बार मिटा तो सत्य है सब में।
रब ने जहां को बनाया, जन्म दिया हमने इच्छाओं को वासनाओ के रूप में अलग-अलग ।
उसने तो दिया था निर्मल प्रेम, बाकी सब कुछ को पैदा किया हमने अतृप्त होके
जो जगजाहिर था उसे खोजने निकले, अपनी अज्ञानता के सहारे ।
तेरा कहाँ हुआ जो माना होता, तो आज ये हाल न होता हम सबका ।
ऐ पिता आज पुकारते है तुझे, अपने दिल का हाल कहने के लिये ।
जरूरत पे आवाज देते है, पूरी होते खो जाते है माया के पीछे ।
अब मन बना चुका हूँ तेरी कृपा से, उबरके तेरे चरणो में गुजारूँ जिंदगी ।
- डॉ.संतोष सिंह
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मैं तो निहाल हो गया, प्रभु पाके तुझे ।
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