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Hymn No. 971 | Date: 14-Apr-1999
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इंन्तजार करता हूँ हर पल, तुझसे मुलाकात करने के लिये ।
इंन्तजार करता हूँ हर पल, तुझसे मुलाकात करने के लिये ।
संभलता नहीं दिल मेरा, ढूंढता है तुझे हर पल यहाँ-वहाँ ।
कैसे बताऊँ क्या हालत हो गयी है मेरी, रातों को नींद नहीं दिन को चैन नहीं।
मान या न मान काटे नहीं, कटता समय, इंतजार में बीतता है हर पल ।
न ख्याल होता है, न ही ख्वाब टकटकी बांधके बैठा रहता हूँ तेरी तसवीर के सामने ।
दिल की तू छोड मन में भी कोई बात न रहती, जब तेरे सामने होते है ।
बडा मुश्किल होता जा रहा है जीना मेरा, लगता है कुछ रूक सा गया है बाहर- भीतर ।
बेमतलब की मुस्कान रहती है हर पल, अनजानों से दुआ सलाम होती है ।
समझ न पा रहा हूँ, ये क्या होता जा रहा है मुझे ।
इंतजार की धडियाँ बिताते हुये, अजीब सी उमंगो से घिरा पाता हूँ खुदको ।


- डॉ.संतोष सिंह