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Hymn No. 972 | Date: 14-Apr-1999
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सुनायेंगे एक दिन प्यार की दास्ताँ सबको, देख लेना कम पड़ जायेंगे कहने को शब्द ।
सुनायेंगे एक दिन प्यार की दास्ताँ सबको, देख लेना कम पड़ जायेंगे कहने को शब्द ।
छाया रहेगा मुझपे प्यार का जनून, वहां न सुनना होगा न सुनाना, हम तो प्यार की मौजो पे बहते रहेगे ।
दिल से निकलेगा प्यार, आखो में होगी तसवीर प्यार की, सुनता रहूंगा प्यार के बोल ।
संग-संग सुर मिलाऊंगा प्यार के ।
भेद सारा मिट जायेगा, जीने और मौत का कोई खेल न होगा, सरेआम हो या अकेले प्यार से प्यार का दम भरते रहेंगे ।
शब्द बेजान से लगते है तेरे प्यार की चर्चा करते समय, समझने-समझाने के लिये प्यार करना पड़ता है उससे ।
शिकार जो हुआ प्यार का उसके, जीना दुश्वार हो गया, मस्ती का आलम होता है प्यार बालम बन जाता है ।
टूट जाता है तन मन का अहसास, दिल में गूंजती हो जब प्यार की आवाज, प्यार के जुनून में सुकूं मिलता है सब कुछ में ।
कोई न रहता प्यार जब होता है परम पिता से, परम पिता का भी भेद है मिट जाता प्यार में ।
प्यार में प्यार के सिवाय कुछ सूझता नहीं, अगर कुछ सूझता है तो प्यार के सिवाय सुनने का दिल करता नहीं ।
बयाँ कर नहीं सकता प्यार के बारे में, अगर बयाँ करना पडा तो कहूँगा प्यार
प्यार, प्यार, और प्यार ...... प्यार से बढकर कुछ भी नहीं संसार में ।


- डॉ.संतोष सिंह