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Hymn No. 975 | Date: 15-Apr-1999
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झुक, झुक के झुकाऊंगा तेरे प्यार में इस सारे जहां को ।
झुक, झुक के झुकाऊंगा तेरे प्यार में इस सारे जहां को ।
आने न दूंगा दिल में अब कोई दूसरा भाव तेरे प्यार के सिवाय ।
मेरे मन का है बदला-बदला स्वरूप, तेरे प्यार में मिट गयी सारी कुरूपता ।
दिल-दिल न रहा वो तेरे प्यार में डूबके, मस्ती का सामान बन गया ।
अंग-अंग से फूट रही है मस्ती, जो जताती है तेरे प्यार में कुर्बान हो गये ।
कैसे कहूँ कुछ और बात मैं तुझसे, कुछ न सुझ रहा है दिल को तेरे प्यार के सिवाय ।
जुदा-जुदा मै रहता हूँ लोगो के बीच रहके, जब मगन रहता हूँ तेरे प्यार में ।
किस्से कहानियों में जो पढ़ा था, वैसे हालात पैदा हो गये तेरे प्यार में ।
अगर ये मेरा ख्वाब है तो, टूटने न देना तू कभी इसे ।
हम तो पहले ही मर-मिट चुके हैं, तेरे प्यार की मस्ती में ।


- डॉ.संतोष सिंह