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Hymn No. 982 | Date: 17-Apr-1999
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दगा देते है हम तुझे बार-बार, प्यार में तू न करता कोई सवाल ।
दगा देते है हम तुझे बार-बार, प्यार में तू न करता कोई सवाल ।
लुटाया है तूने अपने आपको न जाने कितनी बार, हमारे दिलो को प्रेम से सींचने के लिये ।
खबर होते हुये खबर न रखते हैं, माया के दलदल में कदम रखते हुये ।
गले तक आता है जब, तब तुझे अपने प्रेम की याद दिलाते है ।
अपने मन की बात पूरी होते न देखके, मढ़ देते हैं सारा दोष तुझपे ।
दगा दिया हमने कई बार तुझे, अगर साथ छोड़ देगा तू क्या हाल होगा हमारा।
इतना ही है अगर विश्वास अपने आप पे, तो न की थी शिकवा शिकायत तुझसे ।
हर हाल में खुश होते, हालात बदले या न बदले डिगे रहते अपने आप पे ।
ज्यादा से ज्यादा क्या होता जब पल दो पल है करके जीवन भी गुजर जाता ।
सुखमय भी गुजरा, दुखमय भी गुजरा, तन मन बदलता है, मस्त रहे हम अपने आप जो होना होगा होता रहेगा ।


- डॉ.संतोष सिंह