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Hymn No. 985 | Date: 18-Apr-1999
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मुझे प्यार है, मुझे प्यार है जो तेरी याद दिलाये, उस छवि से मुझे प्यार है ।
मुझे प्यार है, मुझे प्यार है जो तेरी याद दिलाये, उस छवि से मुझे प्यार है ।
मुझे प्यार है, तुझसे माँ के ममतामय रूप में अपनी वत्सलता बरसाता सबपे उस छवि से ...
मुझे प्यार है, तेरे पिता रूप से जो करता सबका कल्याण, उस छवि से मुझे प्यार है ।
मुझे प्यार है, जब तू सदगुरु बनके है आता धरा पे मुक्त कराने सबको उस छवी से ....
मुझे प्यार है, जब तू बंधु बनके आता मर्यादा का हम सबको पाठ पढाता उस छवि से ।
मुझे प्यार है, जब तू सखा बनके पग-पग पे साथ निभाता कर्ममय जीवन का पाठ पढ़ाता उस ...
मुझे प्यार है, तेरे प्रेममय रूप से बजाके बांसुरी हर लेता हमारे तन मनकी सुध-बुध को उस छवि....
मुझे प्यार है, तेरे ज्योर्तिमय रूप से जिससे रोशनी से नाश होता है अज्ञानता का उस छवि......
मुझे प्यार है, तेरे निराकार रूप से जिससे आकार लेते है हम सब ये संसार सारा उस छवि .....
मुझे प्यार है सबसे ज्यादा तेरे कलामय रूप से जहां प्रेम का पाठ पढता ये अनाथ इस छवि से सबसे ज्यादा ।


- डॉ.संतोष सिंह