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Hymn No. 986 | Date: 18-Apr-1999
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लगा मत कोई आदत अधूरी, कर लेने दे तू उसे पूरी ।
लगा मत कोई आदत अधूरी, कर लेने दे तू उसे पूरी ।
प्रेम किया है कोई चोरी नहीं, सजा जो है देना दे देना करेगे प्यार तुझे ।
जरूरत से न है किया, ये तो है दिल की तड़प जो हर पल सताये ।
जो मजबूर करती है याद करने को तुझे, उमंगो से भरा रहता मन मेरा ।
ढिंढोरा न हूँ पीटता, दर्द है दिल में जो गाते है प्रेम का गीत ।
लालच है बस एक, जनम जनम के लिये तुझे अपना बनाने की ।
मुँह मत तू ऐसे फेर, तडपा हूँ तो तड़पाना आता है मुझे ।
दीवाना मैं कोई ऐरा-गैरा नहीं, तेरे न को हाँ में बदलना आता है ।
तुझे पाने के लिये करना पड़े कोई काम, अंजाम दे देंगे नाम लेके तेरा ।
प्यार का पिया है जाम डिगा नहीं सकता कोई मुझे इस राह से ।


- डॉ.संतोष सिंह