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Hymn No. 988 | Date: 19-Apr-1999
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कोई करीब न है मेरे, उसके जितना ।
कोई करीब न है मेरे, उसके जितना ।
दिल की धड़कन बनके गूंजते है गीत उसके ।
छवि छायी रहती है हर पल दिलो दिमाग पे ।
पहचान नहीं पाते सिवाय उसके किसी और को ।
तकदीर-तदबीर का पता न है मुझे ।
जीवन में उसके आने से, बदल गयी है तस्वीर ।
इज्जत की बात न हूँ करता, जो वो साथ रहता ।
इस क्षुद्र को घमंड अपने आप पे हो जाता ।
हाँ इतराता फिरता हूँ, उसके करीब अपने आपको पाके ।
जिसको लोग खोजते है, उसका करीब मै बन गया ।


- डॉ.संतोष सिंह