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Hymn No. 989 | Date: 19-Apr-1999
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खुदा तेरे रूप कितने, हर एक की चर्चा में भरते ग्रंथ सारे ।
खुदा तेरे रूप कितने, हर एक की चर्चा में भरते ग्रंथ सारे ।
प्रकटाया है जग को तूने प्रेम और आनंद से समेटा अपनी विशालता में ।
एक से एक अदभुत रचना की है तूने, चाहे जीव हो या अजीव ।
खुद को बनाया इंन्सान के रूप में, अटूट क्षमता दी तूने बुद्धि की ।
समग्रता अपनी निचोड़ डाली, सार बताया सारे संसार का ।
प्रेरित किया परम पिता को हासिल करने का, प्रेम और दृढ विश्वास से ।
अनेक लोगों के लिये उसने मार्ग बनाया जाने के लिये माया रूपी संसार से ।
हम भी कम नहीं तेरे किये पे पानी फेरते रहे, ऐ बनाने वाले तुझे मानके ।
हार तूने कभी न मानी, छोड़ा हमको कर्मो के सागर में खुदको खुदसे बचाने के लिये ।


- डॉ.संतोष सिंह