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Hymn No. 990 | Date: 19-Apr-1999
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अंकुरित हुआ जो प्रेम का बीज हमारे दिलों में ।
अंकुरित हुआ जो प्रेम का बीज हमारे दिलों में ।
प्रभु उसे तू सींचते रहना अपने प्रेम भरे गीतो से ।
बनाया है तूने इंसा, निभाना पड़ता है तन के रस्मो-रिवाजों को ।
रहना चाहता हूँ पास तेरे, जो भी करना पडे बनके तेरा करुँ ।
शुरु से अंत तक जो भी हो संग मेरे, रंगा रहूं प्यार में तेरे ।
कायरता निकाल दे मेरे दिल की, डूब जाये तेरी शेरो-शायरी में ।
फेरे बहुत लगाया, लगा लेने दे फेरा मन को तेरी चौखट का ।
मनचाहा रूप धारण करके रहूँ सदा सेवा में तेरी ।
बुलाया है तूने पास अपने, बाहर था तू पहूँच के मेरी ।
अब न जाने देना पास से कभी तेरे चाहे लेनी पड़े जान मेरी


- डॉ.संतोष सिंह