VIEW HYMN

Hymn No. 993 | Date: 20-Apr-1999
Text Size
अरे छलिया जब से तू आया है, हमारे दिल की गलियों में ।
अरे छलिया जब से तू आया है, हमारे दिल की गलियों में ।
मोह लिया हमारे मन को, सुध-बुध खो देता हूँ तुझे अपने सामने देखके ।
निगाहों से निगाह मिलते ही, मादकता छा जाती है हमपे तेरे प्यार की ।
हर अहसास खो देता हूँ, जब तुझे अपने ख्वाबों में देखता हूँ ।
सच कहूँ तो सोचा न था कभी, तू करीब होगा हमारे इतना ।
मेरे मन का मीत तू बन गया, जब से देखा है तूझे ।
जाता रहता है चैन मेरा, जैसे-जैसे मुलाकात का पल आता है करीब ।
बेकरार हो उठता हूँ तेरे प्यार का अहसास करके ।
बेमानी सा लगता है ये जीवन, प्यार-प्यार के सिवाय कुछ नहीं चाहता ।


- डॉ.संतोष सिंह