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Hymn No. 994 | Date: 20-Apr-1999
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रह जाती है दिल की बात, दिल में हर बार ।
रह जाती है दिल की बात, दिल में हर बार ।
कहना चाहा बहुत बार, निगाह मिलते ही भूला हर बार ।
प्यार है कि धोखा, जहाँ अपना भी होश नहीं होता ।
पागलपन कहीं तो नहीं मेरा, जिसे मान बैठा हूँ मस्ती ।
भूत सवार हो चुका है हमपे तेरे प्यार का खयाल।
सोऊं या जागुँ छुड़ाये नहीं छूटता, तेरे प्यार का खयाल ।
पीछे हटने वालो में से हम नहीं, जाती है जान तो जाने दे ।
तसब्बुर न मिलता है हमें, जब तक मुलाकात न हो जाये तुझसे ।
तड़पते आज है हम, तडपेगा कल तू भी प्यार में हमारे ।
एकतरफा प्यार है तो क्या से, कल को होगा दोनों ओर से ।


- डॉ.संतोष सिंह