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Hymn No. 998 | Date: 21-Apr-1999
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अंदाज लगाने निकला हूँ, मैं तो प्यार का मुसाफिर हूँ ।
अंदाज लगाने निकला हूँ, मैं तो प्यार का मुसाफिर हूँ ।
जो प्यार करता है तुझसे हर पल, रख दे चाहे तू सुख या दुःख में ।
फरियाद करना नहीं चाहूँ तुझसे, तू याद कर लेने दे मुझे ।
गाता हूँ गीत प्यार का जो ख्वाबों में देखे थे हमने संग तेरे ।
लुटाने को कुछ नहीं है मेरे पास, लुट चुका हूं तेरी मुस्कान पे ।
घायल रहता है दिल बिचारा, नयनों से बाण चलाके हाल तू पूछता है ।
कर दे तू किस्सा ये तमाम, शुरुवात में मिलन हो जायेगा हमारा ।
रह न गया है पास कुछ मेरे, मेरा मैं भी तेरे काम आ गया ।
जाता है कुछ तो जाने दो, प्यार जब फूटेगा तो प्यार ही निकलेगा ।
बहते हुये को क्या रोकना, यहाँ-वहाँ कहीं से तो निकल जायेगा ।


- डॉ.संतोष सिंह