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Hymn No. 1000 | Date: 22-Apr-1999
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हारने वालों में से मैं नहीं, जीतने में भले लग जाये समय ।
हारने वालों में से मैं नहीं, जीतने में भले लग जाये समय ।
रोना रोता न हूँ कुछ पाने के लिये, भरते है आँसू तेरा प्यार देखके ।
आज तक क्या दिया है तुझे, कल भी क्या दे पाऊंगा तुझको ।
फिर भी तू भार उठाता है हमारा, निगाहों से अमूल्य धन बरसाके ।
किया न हूँ कुछ ऐसा, हकदार बनूँ सानिध्य तेरा पाने का ।
तेरी कृपा है जो बारंबार दूर करता है हमारे अवगुणों को ।
करते हम हैं नाम तेरा दे देते है कि तू ऐसा चाहता था ।
फिर भी तू करता है हमें प्यार उतना, मौका देता है इक और बार ।
प्रभु हकदार नहीं मै तेरी गोद का, मिटके धूल बन जाने दे तेरी कदमों की ।
गत मेरी सुधर जायेगी, तेरी धरा का अविभाज्य अंग बनके ।


- डॉ.संतोष सिंह